10 हज़ार की कमाई से भी बन सकते हैं करोड़पति, जानिए इस पोस्ट में

बिज़नेस शिक्षा-नौकरी

हेलो दोस्तो! आज मैं आपको बताऊंगा कि क्यों सिर्फ कुछ ही लोग बहुत अमीर बन पाते हैं और ज्यादातर लोग गरीब या मिडिल क्लास ही रह जाते हैं। रॉबर्ट नाम का एक लड़का था जिसके दो बाप थे। अब आप गलत मत समझिए, पहला उसका खुद का बाप था जबकि दूसरा उसके दोस्त का बाप था जिसे वह अपना मुंह बोला बाप मानता था। पहला बाप बहुत ही पढ़ा लिखा था उसने PHD की हुई थी, जबकि दूसरे बाप ने कभी आठवीं भी पास नहीं की थी। दोनों बहुत ही स्मार्ट और परिश्रमी थे लेकिन दोनों की सोच एक दूसरे से बिल्कुल अलग थी। इसलिए दोनों रॉबर्ट को अपनी-अपनी सोच के अनुसार अलग अलग बात सिखाते थे।

  • पहला बाप बोलता था कि पैसा सारे फसाद की जड़ है, जबकि दूसरा बाप बोलता था कि पैसा ना होना ही सारे फसाद की जड़ है।
  • पहला हमेशा रॉबर्ट को महंगी चीजों के बारे में सोचने से मना करता था और कहता था कि यह चीजें हमारी हैसियत के बाहर हैं इसलिए इनके बारे में मत सोचो, जबकि दूसरा बाप कहता था की ऐसे तरीके सोचो जिससे कि महंगी से महंगी चीज भी आप खरीद सको। ऐसा सोचने से दिमाग तेज होगा और नए नए आइडिया भी मिलेंगे जिससे कि वह अधिक पैसा कमा सकता है।
  • उसका पहला बाप कहता कि खूब पढ़ो लिखो और मेहनत करो जिससे कि तुझे एक बड़ी कंपनी में नौकरी मिल जाए और तू एक बड़ा आदमी बन जाए। उसका दूसरा बाप भी कहता कि तू खूब पढ़ लिख और मेहनत कर लेकिन नौकरी के बजाए एक कंपनी खोल जिससे कि तू बहुत सारे लोगों को नौकरी दे पाए।

रॉबर्ट के पास एक सुनहरा अवसर था कि वह दोनों बापों की बात सुने और जो उसे अच्छी लगी उसे फॉलो करें। इसलिए उसने अपने दोनों बापों की बात सुनी और अपने दूसरे बाप की बात मानी जो कि आठवीं पास भी नहीं था और जो उसे नौकरी करने के लिए नहीं बल्कि नौकरी देने के लिए कहता था। उसका यह बाप आगे चलकर अमेरिका के मियामी शहर का सबसे धनवान इंसान बना। उसकी सिखाई बातों से रॉबर्ट ने भी करोड़ों कमाए जबकि रॉबर्ट का दूसरा बाप पूरी जिंदगी गरीब ही रहा।

सबसे महत्वपूर्ण बात जो रॉबर्ट ने अपने दूसरे बाप से सीखी वह थी फाइनेंसियल लिटरेसी यानी कि आर्थिक साक्षरता। जिसमें उसने एसेट्स और लाइबिलिटीज़ के बीच का फर्क समझा।

एसेट्स और लाइबिलिटीज़

अब आप गौर से सुनिए यह नॉर्मल कॉमर्स के विद्यार्थियों को सिखाए गए मीनिंग से थोड़ा अलग है। रॉबर्ट ने काफी आसान शब्दों में इसका मतलब बताया है जो कि कुछ इस प्रकार है।

  • एसेट्स कोई भी ऐसी चीज है जो आपके लिए पैसे बनाकर दे। यानी कि आपकी जेब में पैसे डाले।
  • लाइबिलिटी कोई भी ऐसी चीज है जो आपके पैसे खर्च कराए। यानी कि आपकी जेब से पैसे निकाले।

तो अमीर और गरीब के बीच में बस यही फर्क होता है कि अमीर लोग अपने एसेट्स बनाते हैं, जिससे कि उनके पास निरंतर पैसे आते रहते हैं। जबकि गरीब या मिडिल क्लास लोग सिर्फ लाइबिलिटी पर ही खर्च करते रहते हैं।

उदाहरण

मिसाल के लिए दो दोस्त सुरेश और रमेश थे। दोनों एक ही कंपनी में एक ही पद पर बराबर तनख्वाह पर काम करते थे। रमेश को जब भी सैलरी मिलती वह अपने लिए नए कपड़े नया फोन नई बाइक आदि चीजें लेकर आता। यह चीजें रमेश को अमीर जैसा फील कराती थीं। लेकिन रमेश यह नहीं जानता था कि यह चीजें सिर्फ लाइबिलिटीज़ हैं जो कि उसका पैसा खर्च करा रही हैं। जब वह इन्हें खरीदता है तो भी पैसे खर्च होते हैं और बाद में उसके मेंटेनेंस वगैरह के लिए भी खर्चा आता है। इनकी कीमत भी कुछ दिन बाद कम हो जाएगी और आगे भी भविष्य में कभी यह चीजें उसके लिए पैसे कमा कर नहीं देंगी। लेकिन सुरेश ऐसा नहीं था। वह तब तक ऐसी कोई चीज़ नहीं खरीदता था जब तक कि उसके लिए वह बहुत ही जरूरी ना हो। इन चीजों की जगह पर वह पैसे जमा करके एसेट्स पर खर्च करता था, जैसे कि शेयर के स्टॉक्स, गवर्नमेंट बॉन्ड, रियल एस्टेट प्रॉपर्टी या फिर अपनी पढ़ाई या कुछ ऐसा सीखने के लिए जो कि आगे भविष्य में उसके लिए पैसे बनाकर दे। 2 साल के अंदर सुरेश करोड़पति बन गया जबकि रमेश वैसा का वैसा ही रहा और अपनी कम सैलरी को कोसता रहा। वह बोलता था की कम सैलरी होना ही उसके मिडिल क्लास होने की वजह है।

पैसे का बहाव (कैश फ्लो)

एक गरीब इंसान के पैसे का बहाव कुछ इस तरह से होता है कि वह पैसे कमाता है और सारे पैसे उस की जरूरतों में खत्म हो जाते हैं। एक मिडिल क्लास व्यक्ति पैसे कमाता है और वह पैसे उस की जरूरतों और थोड़ा बहुत शौक मौज में खत्म हो जाते हैं यानी कि सारे पैसे लायबिलिटीज़ में खत्म हो जाते हैं। तो गरीब और मिडिल क्लास के कैश फ्लो में ज्यादा फर्क नहीं है। एक अमीर इंसान का कैश फ्लो कुछ हटके होता है। अमीर लोग जब पैसे कमाते हैं तो उन पैसों को एसेट्स पर खर्च करते हैं यानि कि ऐसी चीजों पर जिनसे उन्हें भविष्य में और ज्यादा पैसा मिलेगा और उनकी कमाई होगी। अब इस एसेट्स की कमाई में से वह अपनी जरूरतें पूरी करते हैं। इस तरह वह अमीर होते जाते हैं क्योंकि उनके बहुत सारे एसेट्स उन्हें कमा कर दे रहे होते हैं जो कि निरंतर बढ़ते ही जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनकी कमाई के साधन बढ़ते चले जाते हैं।

सीख

अगर आपको अमीर बनना है तो हमेशा याद रखिए इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने पैसे कमाते हैं। फर्क इस बात से पड़ता है कि आप उन कमाए हुए पैसों को कहां खर्च करते हैं। अधिकतर लोग इस बात की शिकायत करते हैं कि उनकी कम सैलरी होने की वजह से वह मिडिल क्लास हैं जबकि असलियत यह है कि सैलरी बढ़ने के बाद उनके खर्चे भी बढ़ जाते हैं और वह फिर भी इन्वेस्ट नहीं कर पाते हैं। इसलिए वह वहीं के वहीं रह जाते हैं और कोई भी बचत नहीं कर पाते।

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