गोबर से खाद बनाने की सरल विधि

कृषि

गोबर से खाद बनाने की विधियाँ

भारत में पहले से गोबर से खाद बनाने की दो विधियाँ प्रचलित है

  1. ठंडी विधि
  2. गरम विधि

ठंडी विधि

गोबर खाद की ठंडी विधि

इसके लिये उचित आकार के गड्ढे, 20-25 फुट लंबे, 5-6 फुट चौड़े तथा 3 से लेकर 10 फुट गहरे, खोदे जाते हैं। इनमें गोबर भर दिया जाता है। भरते समय उसे इस प्रकार दबाते हैं कि कोई जगह खाली न रह जाए। गड्ढे का ऊपरी भाग गुंबद की तरह बना लेते हैं और गोबर  से ही उसे लेप लेते हैं। इससे वर्षा ऋतु का अनावश्यक जल उसमें प्रवेश नहीं कर पाता। तत्पश्चात् लगभग तीन महीने तक खाद को बनने के लिये छोड़ देते हैं। इस विधि में गड्ढे का ताप कभी 34 डिग्री से ऊपर नहीं जा पाता क्योंकि गढ़े में रासायनिक क्रियाएँ हवा के अभाव में सीमित रहती हैं। इस विधि में नाइट्रोजनयुक्त पदार्थ खाद से निकलने नहीं पाते।

 

 

नोट: इस विधि में ये ध्यान रखना होता है की वो ही घास या फसलो के अपशिष्ट पदार्थ गड्ढे में डाले जिसमे बीज आदि ना हो। ये बीज फसल में अनचाहे पौधे और खरपतवार बन जाते हैं। इनसे निजात पाने के लिए निराई-गुढ़ाई करनी पड़ती है या फिर खरपतवार नाशक दवा का छिड़काव करना पड़ सकता है।

गरम विधि

इस विधि में गड्ढा खोदने की आवश्यकता नहीं होती है। किसी एक स्थान का चयन कर के उस स्थान पर गोबर इकठ्ठा किया जाता है जिसे घूरा भी कहा जाता है।

घूरा

इस विधि में गोबर की एक पतली तह डाल दी जाती है। हवा की उपस्थिति में रासायनिक परिवर्तन होते हैं, जिससे ताप 60 डिग्री सें. तक पहुँच जाता है। तह को फिर दबा दिया जाता है और दूसरी पतली तह उस पर डाल दी जाती है जिसको तापमान बढ़ने के लिए छोड़ दिया जाता है। इस प्रकार ढेर ऊँचा बनता जाता है। फिर इसे कुछ महीनों (2 से 3 माह) के लिये इसी अवस्था में छोड़ दिया जाता है। कुछ महीने पश्चात गोबर सूखी खाद में बदल जाता है। तब इसे खेत में डाल दिया जाता है। ये कार्य पहले गधे की सहायता से किया जाता था। अब ट्रेक्टर ट्रॉली का उपयोग किया जाता है।

घास, खरपतवार आदि हानिकर पौधों के बीज पशु के चारे में शामिल होते हैं और गोबर में रह जाते हैं। वे सब इस विधि में ताप बढ़ने पर नष्ट हो जाते हैं। प्रत्येक पशु से इस प्रकार 2 से 3 टन गोबर से खाद बन सकती है। इसमें 0.5 से 1.5 प्रतिशत तक नाइट्रोजन 0. 5 प्रतिशत से 0.9 प्रतिशत तक फासफोरस तथा 1.2 से 1.4 प्रतिशत तक पोटाश रहता है।

गोबर से बनार्इ जा सकने वाली शीघ्र खादें

अधिकांशत: जैविक पद्धति के खाद को लोग इसलिए नहीं बनाते क्यूंकि इसमें विभिन्न खादें तथा कीटनाशक बनाने में काफी समय लग जाता है। इस कमी को पूरा करने के उद्देश्य से किसानों एवं वैज्ञानिकों द्वारा गोबर से शीघ्र खादें बनाने की भी कर्इ विधियां विकसित की गर्इ हैं। इनमें प्रमुख हैं-

  1. अमृत पानी विधि
  2. अमृत संजीवनी विधि
  3. जीवामृत खाद विधि तथा
  4. मटका विधि

इनमें से विभिन्न खादों के निर्माण हेतु विभिन्न फार्मूले विकसित किए गए हैं।

गोबर खाद की मटका विधि

उदाहरण: मटका विधि से खाद बनाने के लिए 15 कि.ग्रा. देशी गाय का ताजा गोबर, 15 लीटर ताजा गौमूत्र, तथा 15 लीटर पानी एक मिट्टी के घड़े में घोल लें। इस घोल में आधा कि.ग्रा. गुड़ भी मिला दें। इस घोल के मिट्टी के बर्तन को ऊपर से कपड़ा या टाट मिट्टी से पैक कर दें। 4-6 दिन में इस घोल को 200 लीटर पानी में मिलाकर इस मिश्रण को एक एकड़ में समान रूप से छिड़का दें। यह छिड़काव बुआर्इ के 15 दिन बाद किया जाना चाहिए तथा इसके 7 दिन बाद इसे पुन: अपनाया जाना चाहिए। इन शीघ्र खादों के उपयोग से खेत में करोड़ों सूक्ष्म जीवाणुओं की वृद्धि होगी तथा खेत में ह्यूमस की भी वृद्धि होगी।

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