गेँहू में रोग और उनके उपचार

कृषि

गेंहू बहुत ही नाजुक फसल होती है। इसे रोगों से बचाना अति आवश्यक होता है। गेँहू में रोग और उनके उपचार इस प्रकार हैं।

1- दीमक

दीमक सफेद मटमैले रंग का बहुभक्षी कीट है जो कालोनी बनाकर रहते हैं। श्रमिक कीट पंखहीन छोटे तथा पीले/ सफेद रंग के होते हैं एवं कालोनी के लिए सभी कार्य करते है। बलुई दोमट मृदा, सूखे की स्थिति में दीमक के प्रकोप की सम्भावना रहती है। श्रमिक कीट जम रहे बीजों को व पौधों की जड़ों को खाकर नुकसान पहुंचाते हैं। ये पौधों को रात में जमीन की सतह से भी काटकर हानि पहुंचाती है। प्रभावित पौधे अनियमित आकार में कुतरे हुए दिखाई देते हैं।

पहचान

गेँहू में रोग

रोकथाम

  • खेत में कच्चे गोबर का प्रयोग नहीं करना चाहिए। फसलों के अवशेषों को नष्ट कर देना चाहिए। नीम की खली 10 कुन्तल प्रति हे0 की दर से बुवाई से पूर्व खेत में मिलाने से दीमक के प्रकोप में कमी आती है। भूमि शोधन हेतु विवेरिया बैसियाना 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से 50-60 किग्रा0 अध सडे गोबर में मिलाकर 8-10 दिन रखने के उपरान्त प्रभावित खेत में प्रयोग करना चाहिए।
  • खडी फसल में प्रकोप होने पर सिंचाई के पानी के साथ क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 2.5 ली0 प्रति हे0 की दर से प्रयोग करें।

2- माहॅू

माहॅू, गेँहू में रोग का दूसरा उदाहरण है। यह पंखहीन अथवा पंखयुक्त हरे रंग के चुभाने एवं चूसने वाले मुखांग वाले छोटे कीट होते है । कीट के शिशु तथा प्रौढ़ पत्तियों तथा बालियों से रस चूसते हैं तथा मधुश्राव भी करते हैं। जिससे काले कवक का प्रकोप हो जाता है। प्रकाश संश्लेषण क्रिया बाधित होती है।

पहचान

गेँहू में रोग

रोकथाम

  • गर्मी में गहरी जुताई करनी चाहिए।
  • समय से बुवाई करें।
  • खेत की निगरानी करते रहना चाहिए।
  • 5 गंधपाश(फेरोमैन ट्रैप) प्रति हे0 की दर से प्रयोग करना चाहिए।

गेँहू में रोग के रसायनिक नियंत्रण

गेँहू में रोग के रसायनिक नियंत्रण हेतु निम्नलिखित कीटनाशकों में से किसी एक का प्रयोग करना चाहिए।

  • एजाडिरैक्टिन(नीम आयल) 0.15 प्रतिशत ई0सी0 2.5 ली0 प्रति हे0 की दर से 500-600 ली0 पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए।
  • डाइमेथोएट 30 प्रतिशत ई0सी0 ली0 प्रति हे0 की दर से 500-600 ली0 पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए।
  • मिथाइल-ओ-डेमेटान 25 प्रतिशत ई0सी0 1 ली0 प्रति हे0 की दर से 500-600 ली0 पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए।
  • मोनोक्रोटोफास 36 एस0एल0 750 मिली0 प्रति हे0 की दर से से 500-600 ली0 पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए।

गेंहू में रोग और उन रोगो की रोकथाम के विषय में ऊपर हमने चर्चा की। आपके पास अगर इससे सम्बंधित जानकारी हो तो कमेंट में बताएं।

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