खेतों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए जिप्सम का प्रयोग कब और कैसे करें

 जिप्सम डालना जरूरी क्यों है? किसान फसल उगाने के लिए सामान्यत: नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा पोटैशियम का उपयोग करते है। कैल्शियम एवं सल्फर का उपयोग नहीं करते है। जिससे कैल्शियम एवं सल्फर की कमी की समस्या धीरे-धीरे विकराल रूप धारण कर रही है। इनकी कमी सघन खेती वाली भूमि, हल्की भूमि तथा अपक्षरणीय भूमि में अधिक […]

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भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए जैविक खाद का प्रयोग कैसे करें पूरी जानकारी

भारत में शताब्दियों से जैविक खाद का प्रयोग भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए किया जाता रहा है। जिनमें ये तत्व मुख्य हैं: गोबर की खाद, कम्पोस्ट, हरी खाद व जैविक खाद। इस समय ऐसी कृषि विधियों की आवश्यकता है जिससे अधिक से अधिक पैदावार मिले। तथा मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित न हो। रासायनिक खादों […]

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गेँहू में रोग और उनके उपचार

गेंहू बहुत ही नाजुक फसल होती है। इसे रोगों से बचाना अति आवश्यक होता है। गेँहू में रोग और उनके उपचार इस प्रकार हैं। 1- दीमक दीमक सफेद मटमैले रंग का बहुभक्षी कीट है जो कालोनी बनाकर रहते हैं। श्रमिक कीट पंखहीन छोटे तथा पीले/ सफेद रंग के होते हैं एवं कालोनी के लिए सभी […]

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गेँहू में सिंचाई, गेँहू की कटाई और उपज एवं भंडारण। उपज बढ़ाने के लिए जानें

गेँहू में सिंचाई भारत में लगभग 50 प्रतिशत क्षेत्र में गेहूँ की खेती असिंचित दशा में की जाती है। परन्तु बौनी किस्मों से अधिकतम उपज के लिए सिंचाई आवश्यक है। गेहूँ की बौनी किस्मों को 30-35 हेक्टर से.मी. और देशी किस्मों  को 15-20 हेक्टर से.मी. पानी की कुल आवश्यकता होती है। उपलब्ध जल के अनुसार […]

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असली खाद के पहचान

आजकल बाजार में खाद की कमी होने के चलते नकली खाद को असली खाद बताकर बेचा जा रहा है। नकली खाद खेत में डालने पर फसल में कोई फायदा नहीं होता जबकि किसान को पूरा दाम देना पड़ता है। इस सब से बचने के लिए असली खाद की पहचान करने के बहुत ही सरल तरीके […]

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भारत में प्रयोग होने वाले खेती के नाप

भारत में प्रयोग होने वाले खेती के नाप  उत्तर भारत में फुट(Feet), गज(Yard), मीटर(meter),  फर्लांग,  एकड़(Acre),  जरीब (Jareeb ),  हेक्टेअर (Hectare),  कनाल,  मरला,  बीघा (Beegha),  किल्ला,  बिस्वा,  बिस्वांसी,  उनवांसी, कचवांसी,  के साथ-साथ  क्षेत्रीय  भाषाओं  में-  सेंट,  कोठा,   ग्राउंड,  एरेस,   गुंठा,   मन्डा,  रोड,  कड़ी,  हाथ,  गट्ठा,  आदि  मात्रकों  का  प्रयोग होता है।  देखें  उनसे  सम्बंधित  जानकारी- खेती के नाप : क्षेत्रफल 1 Unwansi (एक उनवांसी) =24.5025 Sq Inch (24.5025 वर्ग इंच) 1 Kachwansi (एक कचवांसी) =20 […]

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गोबर से खाद बनाने की सरल विधि

गोबर से खाद बनाने की विधियाँ भारत में पहले से गोबर से खाद बनाने की दो विधियाँ प्रचलित है ठंडी विधि गरम विधि ठंडी विधि इसके लिये उचित आकार के गड्ढे, 20-25 फुट लंबे, 5-6 फुट चौड़े तथा 3 से लेकर 10 फुट गहरे, खोदे जाते हैं। इनमें गोबर भर दिया जाता है। भरते समय […]

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गेहूँ की खेती

गेहूँ की खेती: बुवाई करने का सही समय और तरीका

जलवायुविक क्षेत्रवार गेहूँ की संस्तुत प्रजातियाँ 1. भावर एवं तराई क्षेत्र जनपद सहारनपुर, मुजफ्फर नगर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहाँपुर, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच एवं श्रावस्ती का उत्तरी भाग। 2. पश्चिमी मैदानी क्षेत्र जनपद सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बुलन्दशहर। 3. मध्य पश्चिमी मैदानी क्षेत्र जनपद बिजनौर, ज्योतिबाफूलेनगर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बदायूँ, पीलीभीत। बुआई […]

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आलू की खेती: आलू की नई किस्में, एक बीघा में कितना होगा उत्पादन, पूरी जानकारी

आलू को सब्जियों का राजा कहा जाता है।आलू की खेती के लिए छोटे दिनों की अवस्था की आवश्यकता होती है। भारत के किसी-किसी भाग में तो पूरे वर्ष आलू की खेती की जाती है। आइये आपको बताते हैं कि इस समय आलू की खेती के लिए कौन-कौन सी किस्में हैं। यह है आलू की किस्में केंद्रीय […]

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आलू की खेती: बुवाई करने का सही समय और तरीका

आलू की उत्पत्ति दक्षिण अमेरिका को माना जाता है, लेकिन भारतवर्ष में आलू प्रथम बार सत्रहवीं शताब्दी में यूरोप से आया। चावल, गेहूँ, गन्ना के बाद क्षेत्रफल में आलू का चौथा स्थान है। आलू की खेती में प्रति इकाई क्षेत्रफल में अन्य फसलों (गेहूँ, धान एवं मूँगफली) की अपेक्षा अधिक उत्पादन मिलता है तथा प्रति […]

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पशु

ये हैं पशुओं में लगने वाले प्रमुख रोग तथा उनके उपचार

ये हैं पशुओं में लगने वाले प्रमुख रोग तथा उनके उपचार मवेशी या अन्य पशुधन के बीमार हो जाने पर उनका इलाज करने तथा उन्हें तंदुरूस्त बनाये  रखने का इंतजाम करना ज्यादा अच्छा है। कहावत प्रसिद्ध है  “समय से पहले चेते किसान”। पशुधन के लिए साफ-सुथरा और हवादार घर– बथान, सन्तुलित खान – पान तथा […]

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